अल-आराफ · 124/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَافٍ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ ۝١٢٤
La uqatti`anna aidiyakum wa arjulakum min khilaafin summa la usallibannakum ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
मै तो यक़ीनन तुम्हारे (एक तरफ के) हाथ और दूसरी तरफ के पॉव कटवा डालूंगा फिर तुम सबके सब को सूली दे दूंगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَأُقَطِّعَنَّ: मैं अवश्य काट दूँगा।
  • مِنْ خِلَافٍ: उल्टे तरीके से, यानी एक तरफ़ का हाथ और दूसरी तरफ़ का पैर।
  • لَأُصَلِّبَنَّكُمْ: मैं अवश्य तुम्हें सूली पर चढ़ाऊँगा (फाँसी दूँगा)।
  • أَجْمَعِينَ: तुम सबको एक साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

फ़िरऔन ने जादूगरों को धमकी देते हुए कहा कि जब उसने देखा कि उन्होंने मूसा (अलैहिस्सलाम) की बात मान ली है और ईमान ले आए हैं, तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ और बोला: "मैं तुम्हारे हाथ और पैर उल्टे तरीके से काट दूँगा — यानी एक व्यक्ति का दाहिना हाथ और बायाँ पैर, या बायाँ हाथ और दाहिना पैर — ताकि तुम्हारी शक्ल विकृत हो जाए और लोगों के लिए तुम एक सबक बनो। फिर मैं तुम सबको खजूर के तनों पर सूली चढ़ा दूँगा, ताकि दूसरे लोग देखें और तुम्हारे जैसा करने से डरें।" यह धमकी उसने इसलिए दी ताकि लोग उसके खिलाफ़ न जाएँ और उसके आदेशों की अवहेलना न करें। लेकिन जादूगरों ने, जिन्होंने सच्चाई को पहचान लिया था, उसकी धमकियों की परवाह नहीं की और अल्लाह पर भरोसा करते हुए सच्चाई पर दृढ़ रहे।

फ़ायदे (सबक):

  1. सच्चाई और ईमान की ताकत यह है कि जब कोई व्यक्ति हक़ को पहचान लेता है, तो दुनिया की कोई भी धमकी, चाहे वह जान से मारने की ही क्यों न हो, उसे सच्चाई से विचलित नहीं कर सकती।
  2. जादूगरों का ईमान लाना इस बात का सबूत है कि जब सच्चाई सामने आ जाए, तो उसे मान लेना चाहिए, भले ही उसके लिए कितनी ही बड़ी क़ीमत क्यों न चुकानी पड़े।
  3. यह आयत बताती है कि अल्लाह के वफ़ादार बंदे दुनिया की ताकतवर हुकूमतों से नहीं डरते, क्योंकि उन्हें यकीन होता है कि असली इज़्ज़त और रुसवाई अल्लाह के हाथ में है।
  4. फ़िरऔन जैसे ज़ालिम हुक्मरानों की धमकियाँ उनके ज़ुल्म और कमज़ोरी को दर्शाती हैं, जबकि ईमानवालों का सब्र और अल्लाह पर भरोसा उन्हें अज़ीम बनाता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 122-126 — अल-आराफ

122رَبِّ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
जो मूसा व हारून का परवरदिगार है
123قَالَ فِرْعَوْنُ آمَنتُم بِهِ قَبْلَ أَنْ آذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَمَكْرٌ مَّكَرْتُمُوهُ فِي الْمَدِينَةِ لِتُخْرِجُوا مِنْهَا أَهْلَهَا ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
फिरऔन ने कहा (हाए) तुम लोग मेरी इजाज़त के क़ब्ल (पहले) उस पर ईमान ले आए ये ज़रूर तुम लोगों की मक्कारी है जो तुम लोगों ने उस शहर में फैला रखी है ताकि उसके बाशिन्दों को यहाँ से निकाल कर बाहर करो पस तुम्हें अन क़रीब ही उस शरारत का मज़ा मालूम हो जाएगा
124لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَافٍ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ
मै तो यक़ीनन तुम्हारे (एक तरफ के) हाथ और दूसरी तरफ के पॉव कटवा डालूंगा फिर तुम सबके सब को सूली दे दूंगा
125قَالُوا إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ
जादूगर कहने लगे हम को तो (आख़िर एक रोज़) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना (मर जाना) है
126وَمَا تَنقِمُ مِنَّا إِلَّا أَنْ آمَنَّا بِآيَاتِ رَبِّنَا لَمَّا جَاءَتْنَا ۚ رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ
तू हमसे उसके सिवा और काहे की अदावत रखता है कि जब हमारे पास ख़ुदा की निशानियाँ आयी तो हम उन पर ईमान लाए (और अब तो हमारी ये दुआ है कि) ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा)
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
124आयत

अनुवाद — अल-आराफ 124

सूरा अल-आराफ आयत 124 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मै तो यक़ीनन तुम्हारे (एक तरफ के) हाथ और दूसरी…

सूरा आयत 124/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 122–126. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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