अल-आराफ · 125/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالُوا إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ ۝١٢٥
Qaaloo innaaa ilaa Rabbinaa munqaliboon
📖 हिंदी अर्थ
जादूगर कहने लगे हम को तो (आख़िर एक रोज़) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना (मर जाना) है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُنقَلِبُونَ: लौटने वाले, पलटकर जाने वाले। इसका अर्थ है अपने रब की ओर लौटना और उसके सामने हाज़िर होना।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब फ़िरऔन ने जादूगरों को कड़ी सज़ा और अंग-भंग की धमकी दी, तो उन्होंने निडर होकर जवाब दिया: "हमें कोई परवाह नहीं, क्योंकि हमें यक़ीन है कि हमें अपने रब की ओर लौटकर जाना है।" उन्होंने यह बात उस वक़्त कही जब उन्हें मूसा (अलैहिस्सलाम) के हाथों का करिश्मा देखकर सच्चाई का पता चल चुका था और उनके दिलों में ईमान की रोशनी जगमगा उठी थी। उन्होंने फ़िरऔन की धमकियों को हँसी में उड़ाते हुए कहा कि हमारा असली मंज़िल तो हमारे रब की बारगाह है, और उसी की ओर हमें पलटना है। वे जानते थे कि फ़िरऔन का अज़ाब तो बस इस दुनिया तक सीमित है, लेकिन अल्लाह का अज़ाब और उसका इनाम आख़िरत में हमेशा के लिए है। इसलिए उन्होंने दुनिया की मामूली सज़ा को झेलना बेहतर समझा, ताकि आख़िरत में अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बन सकें। उनका यह जवाब ईमान की गहराई और यक़ीन की मज़बूती का प्रतीक था, क्योंकि उन्होंने फ़िरऔन के सामने सच्चाई का ऐलान करते हुए दुनिया की हर चीज़ को छोड़ दिया।

फ़ायदे (सबक):

  1. ईमान की हक़ीक़त यह है कि इंसान को दुनिया की किसी भी ताक़त का डर नहीं होता, जब उसे अपने रब की ओर लौटने का यक़ीन हो जाए।
  2. आख़िरत पर ईमान इंसान को बड़ी से बड़ी मुसीबत और सज़ा का सामना करने की हिम्मत देता है, क्योंकि वह जानता है कि असली इनाम और सज़ा अल्लाह के पास है।
  3. दुनिया की तकलीफ़ें और अज़ाब चाहे कितने भी सख़्त हों, वे अस्थायी हैं, जबकि अल्लाह का इनाम और अज़ाब हमेशा रहने वाला है। इसलिए समझदार इंसान वही है जो दुनिया की चीज़ों को आख़िरत पर कुर्बान कर दे।
  4. जब सच्चाई सामने आ जाए, तो उसे कबूल करने में देर नहीं करनी चाहिए, चाहे उसकी क़ीमत कुछ भी हो। जादूगरों ने सच्चाई देखते ही फ़ौरन ईमान ले आए और दुनिया की हर चीज़ को ठुकरा दिया।
  5. यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि ज़ुल्म और सितम के सामने झुकना नहीं चाहिए, बल्कि सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, क्योंकि अंजाम अल्लाह के पास है और वही सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है।
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📜 आयत 123-127 — अल-आराफ

123قَالَ فِرْعَوْنُ آمَنتُم بِهِ قَبْلَ أَنْ آذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَمَكْرٌ مَّكَرْتُمُوهُ فِي الْمَدِينَةِ لِتُخْرِجُوا مِنْهَا أَهْلَهَا ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
फिरऔन ने कहा (हाए) तुम लोग मेरी इजाज़त के क़ब्ल (पहले) उस पर ईमान ले आए ये ज़रूर तुम लोगों की मक्कारी है जो तुम लोगों ने उस शहर में फैला रखी है ताकि उसके बाशिन्दों को यहाँ से निकाल कर बाहर करो पस तुम्हें अन क़रीब ही उस शरारत का मज़ा मालूम हो जाएगा
124لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَافٍ ثُمَّ لَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ
मै तो यक़ीनन तुम्हारे (एक तरफ के) हाथ और दूसरी तरफ के पॉव कटवा डालूंगा फिर तुम सबके सब को सूली दे दूंगा
125قَالُوا إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ
जादूगर कहने लगे हम को तो (आख़िर एक रोज़) अपने परवरदिगार की तरफ लौट कर जाना (मर जाना) है
126وَمَا تَنقِمُ مِنَّا إِلَّا أَنْ آمَنَّا بِآيَاتِ رَبِّنَا لَمَّا جَاءَتْنَا ۚ رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ
तू हमसे उसके सिवा और काहे की अदावत रखता है कि जब हमारे पास ख़ुदा की निशानियाँ आयी तो हम उन पर ईमान लाए (और अब तो हमारी ये दुआ है कि) ऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा)
127وَقَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ أَتَذَرُ مُوسَىٰ وَقَوْمَهُ لِيُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ وَيَذَرَكَ وَآلِهَتَكَ ۚ قَالَ سَنُقَتِّلُ أَبْنَاءَهُمْ وَنَسْتَحْيِي نِسَاءَهُمْ وَإِنَّا فَوْقَهُمْ قَاهِرُونَ
और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले और फिरऔन की क़ौम के चन्द सरदारों ने (फिरऔन) से कहा कि क्या आप मूसा और उसकी क़ौम को उनकी हालत पर छोड़ देंगे कि मुल्क में फ़साद करते फिरे और आपके और आपके ख़ुदाओं (की परसतिश) को छोड़ बैठें- फिरऔन कहने लगा (तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब ही उनके बेटों की क़त्ल करते हैं और उनकी औरतों को (लौन्डियॉ बनाने के वास्ते) जिन्दा रखते हैं और हम तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं
अल-आराफकुरान सूची
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125आयत

अनुवाद — अल-आराफ 125

सूरा अल-आराफ आयत 125 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जादूगर कहने लगे हम को तो (आख़िर एक रोज़) अपने…

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Tuesday, August 18, 2026

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