अल-लैल · 3/21
अनुवाद उच्चारण — अल-लैल
وَمَا خَلَقَ الذَّكَرَ وَالْأُنثَىٰ ۝٣
Wa maa khalaqaz zakara wal unthaa
📖 हिंदी अर्थ
और उस (ज़ात) की जिसने नर व मादा को पैदा किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَمَا خَلَقَ: "और उसकी क़सम जिसने पैदा किया" — यहाँ "مَا" का प्रयोग क़सम (शपथ) के लिए हुआ है, यानी "उस ज़ात की क़सम जिसने..."
  • الذَّكَرَ وَالْأُنثَىٰ: "नर और मादा" — यानी पुरुष और स्त्री, या नर और मादा प्राणी।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी महान शक्ति और रचना की अद्भुत प्रणाली की क़सम खाई है। उसने बताया कि उसने हर प्राणी को दो प्रकारों में बनाया — नर और मादा। यह सृष्टि का एक बुनियादी नियम है जो मनुष्यों, जानवरों, पक्षियों और यहाँ तक कि पेड़-पौधों में भी पाया जाता है। यह विभाजन अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) और कुदरत (शक्ति) का प्रमाण है, क्योंकि इसी के माध्यम से नस्लों का विस्तार होता है, जीवन चलता है और पृथ्वी पर संतुलन बना रहता है।

इस आयत में "الذَّكَرَ وَالْأُنثَىٰ" से मुख्य रूप से आदम (अलैहिस्सलाम) और हव्वा (रज़ियल्लाहु अन्हा) की ओर इशारा है, क्योंकि वे ही मानव जाति के मूल हैं। लेकिन यह सामान्य रूप से हर नर और मादा को भी शामिल करता है। अल्लाह ने इस क़सम के बाद अगली आयत में कहा कि "तुम्हारे कर्म अलग-अलग हैं" — यानी जिस तरह अल्लाह ने नर और मादा को अलग-अलग बनाया, उसी तरह लोगों के कर्म भी अलग-अलग हैं। कोई अच्छाई की ओर जाता है, कोई बुराई की ओर। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जिस अल्लाह ने इतनी बारीकी से हर चीज़ को बनाया है, वह हमारे कर्मों को भी देख रहा है और उनका हिसाब लेगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — नर और मादा का यह नियम, उनके बीच का प्यार, परिवारों की बुनियाद, बच्चों की परवरिश — तो यह सब अल्लाह की रहमत और हिकमत का नमूना है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने जीवन में अल्लाह के बताए रास्ते पर चलना चाहिए, क्योंकि जिसने हमें पैदा किया है, वही हमारी भलाई को सबसे अच्छी तरह जानता है। इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की हर रचना में एक मक़सद है, और हमारी ज़िंदगी भी बेमक़सद नहीं है — हमें अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि अल्लाह की रज़ा (खुशी) हासिल हो सके। यह क़सम इसलिए खाई गई ताकि हम यक़ीन करें कि हमारे कर्मों का फल ज़रूर मिलेगा — नेकी का फल नेकी और बुराई का फल बुराई।



📜 आयत 1-5 — अल-लैल

1وَاللَّيْلِ إِذَا يَغْشَىٰ
रात की क़सम जब (सूरज को) छिपा ले
2وَالنَّهَارِ إِذَا تَجَلَّىٰ
और दिन की क़सम जब ख़ूब रौशन हो
3وَمَا خَلَقَ الذَّكَرَ وَالْأُنثَىٰ
और उस (ज़ात) की जिसने नर व मादा को पैदा किया
4إِنَّ سَعْيَكُمْ لَشَتَّىٰ
कि बेशक तुम्हारी कोशिश तरह तरह की है
5فَأَمَّا مَنْ أَعْطَىٰ وَاتَّقَىٰ
तो जिसने सख़ावत की और अच्छी बात (इस्लाम) की तस्दीक़ की
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अनुवाद — अल-लैल 3

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Tuesday, August 18, 2026

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