अस-साफ्फात · 141/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ الْمُدْحَضِينَ ۝١٤١
Fasaahama fakaana minal mudhadeen
📖 हिंदी अर्थ
तो (अहले कश्ती ने) कुरआ डाला तो (उनका ही नाम निकला) यूनुस ने ज़क उठायी (और दरिया में गिर पड़े)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَسَاهَمَ: क़ुरआ (lottery) डाली, यानी चिट्ठी डाली या क़ुरआ डाला।
  • الْمُدْحَضِينَ: वे लोग जो हार गए, जिनका पलड़ा हल्का रहा, यानी जो क़ुरआ में मात खा गए।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से नाराज़ होकर बिना अल्लाह की इजाज़त के उन्हें छोड़ दिया और एक भरी हुई नाव में सवार हो गए, तो समुद्र में तूफ़ान आ गया और नाव पर बोझ बढ़ गया। नाव डूबने के ख़तरे में पड़ गई। तब नाव वालों ने फ़ैसला किया कि क़ुरआ (चिट्ठी) डालकर किसी एक व्यक्ति को समुद्र में फेंक दिया जाए ताकि नाव हल्की हो जाए और बाक़ी लोग बच जाएँ। क़ुरआ डाला गया, और अल्लाह की क़ुदरत से हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) का नाम निकला। यानी वे उन लोगों में से हो गए जो क़ुरआ में हार गए और उन्हें समुद्र में डाल दिया गया। यह अल्लाह की तरफ़ से एक इम्तिहान और तरबियत थी, क्योंकि उन्होंने अपनी क़ौम से नाराज़ होकर अल्लाह की इजाज़त के बिना हिजरत की थी। अल्लाह ने उन्हें इस तरह सबक़ सिखाया और फिर उन्हें मछली के पेट में डालकर आज़माया, ताकि वे अपनी ग़लती पर पछताएँ और अल्लाह की रहमत की तरफ़ लौटें।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की इजाज़त के बिना कोई काम नहीं करना चाहिए, चाहे वह कितना ही अच्छा क्यों न लगे। हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) जैसे नबी को भी जब अल्लाह की इजाज़त के बिना कदम उठाना पड़ा, तो उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन अल्लाह की रहमत यह है कि जब बंदा अपनी ग़लती पर पछताता है और अल्लाह की तरफ़ लौटता है, तो अल्लाह उसे माफ़ कर देता है और उसकी मुश्किलें आसान कर देता है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम हर मामले में अल्लाह की रज़ा और उसके हुक्म को पेश-ए-नज़र रखें, और जब कोई मुश्किल आए तो सब्र करें और अल्लाह से दुआ करें। अल्लाह हमेशा अपने बंदों की मदद करता है, बशर्ते वे उसकी तरफ़ सच्चे दिल से रुजू करें।



📜 आयत 139-143 — सूरा अस-साफ्फात

139وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
और इसमें शक नहीं कि यूनुस (भी) पैग़म्बरों में से थे
140إِذْ أَبَقَ إِلَى الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ
(वह वक्त याद करो) जब यूनुस भाग कर एक भरी हुई कश्ती के पास पहुँचे
141فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ الْمُدْحَضِينَ
तो (अहले कश्ती ने) कुरआ डाला तो (उनका ही नाम निकला) यूनुस ने ज़क उठायी (और दरिया में गिर पड़े)
142فَالْتَقَمَهُ الْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌ
तो उनको एक मछली निगल गयी और यूनुस खुद (अपनी) मलामत कर रहे थे
143فَلَوْلَا أَنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُسَبِّحِينَ
फिर अगर यूनुस (खुदा की) तसबीह (व ज़िक्र) न करते
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
141आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 141

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Saturday, October 3, 2026

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