अल-आला · 7/19
अनुवाद उच्चारण — अल-आला
إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ يَعْلَمُ الْجَهْرَ وَمَا يَخْفَىٰ ۝٧
Illaa maa shaaa`al laah; innahoo ya`lamul jahra wa maa yakhfaa
📖 हिंदी अर्थ
मगर जो ख़ुदा चाहे (मन्सूख़ कर दे) बेशक वह खुली बात को भी जानता है और छुपे हुए को भी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ: लेकिन जो अल्लाह चाहे (उसे भुला देना या मंसूख कर देना)।
  • الْجَهْرَ: खुली बातें, प्रकट कार्य।
  • مَا يَخْفَى: छिपी हुई बातें, वह सब जो दिलों में हो या गुप्त रूप से किया जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! अल्लाह तआला आपको क़ुरआन इस तरह पढ़ाएगा कि आप उसे कभी न भूलेंगे, और यह अल्लाह का वादा है जो अवश्य पूरा होगा। लेकिन अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ भी नहीं होता — यदि अल्लाह चाहे तो किसी आयत को भुला दे या उसे मंसूख (रद्द) कर दे, और यह उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) से होता है, किसी ऐसी मसलहत (भलाई) के लिए जिसे वही जानता है। यह कोई कमी नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और उसकी योजना का हिस्सा है, ताकि शरीयत हर दौर और हर हालत के लिए बेहतरीन रास्ता दिखा सके।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "वह जानता है जो खुला है और जो छिपा है।" यानी अल्लाह तआला को हर चीज़ का पूरा इल्म है — चाहे वह ज़बान से कही जाए, किसी काम में दिखे, या दिल में छिपी हो, या रात की अंधेरी में की जाए। उससे कुछ भी पोशीदा (छिपा) नहीं है। यह बात हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है कि हम जहाँ भी हों, जो भी करें, अल्लाह हमें देख रहा है और हमारे इरादों को जानता है। इसलिए हमें चाहिए कि अपने अंदर और बाहर दोनों को सही रखें — नेक इरादे रखें, अच्छे काम करें, और याद रखें कि अल्लाह की नज़र से कोई चीज़ नहीं बच सकती।

यह आयत हमें तसल्ली देती है कि अल्लाह का इल्म असीम है, और उसकी हर मर्ज़ी में भलाई है। जब हम यह जान लें कि अल्लाह हमारे ज़ाहिर और बातिन (बाहरी और भीतरी) सब कुछ जानता है, तो हमारा दिल उसकी इबादत में लग जाता है, और हम उसकी रहमत की उम्मीद रखते हुए उसके हुक्मों पर चलते हैं। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें, उसकी मर्ज़ी पर राज़ी रहें, और उससे डरते हुए भी उसकी रहमत की आस लगाए रखें। क़ुरआन हमारे लिए रहनुमा है, और अल्लाह का वादा है कि वह हमें समझाएगा और भुलाने से बचाएगा, बशर्ते हम उसकी किताब को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अल-आला

5فَجَعَلَهُ غُثَاءً أَحْوَىٰ
फिर ख़ुश्क उसे सियाह रंग का कूड़ा कर दिया
6سَنُقْرِئُكَ فَلَا تَنسَىٰ
हम तुम्हें (ऐसा) पढ़ा देंगे कि कभी भूलो ही नहीं
7إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ يَعْلَمُ الْجَهْرَ وَمَا يَخْفَىٰ
मगर जो ख़ुदा चाहे (मन्सूख़ कर दे) बेशक वह खुली बात को भी जानता है और छुपे हुए को भी
8وَنُيَسِّرُكَ لِلْيُسْرَىٰ
और हम तुमको आसान तरीके की तौफ़ीक़ देंगे
9فَذَكِّرْ إِن نَّفَعَتِ الذِّكْرَىٰ
तो जहाँ तक समझाना मुफ़ीद हो समझते रहो
अल-आलाकुरान सूची
19आयत
मक्कीRevelation
7आयत

अनुवाद — अल-आला 7

सूरा अल-आला आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जो ख़ुदा चाहे (मन्सूख़ कर दे) बेशक वह खुली…

सूरा आयत 7/19 — अल-आला الأعلى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आला सुनें, अल-आला अनुवाद, अल-आला mp3, अल-आला pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए