Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ: लेकिन जो अल्लाह चाहे (उसे भुला देना या मंसूख कर देना)।
- الْجَهْرَ: खुली बातें, प्रकट कार्य।
- مَا يَخْفَى: छिपी हुई बातें, वह सब जो दिलों में हो या गुप्त रूप से किया जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! अल्लाह तआला आपको क़ुरआन इस तरह पढ़ाएगा कि आप उसे कभी न भूलेंगे, और यह अल्लाह का वादा है जो अवश्य पूरा होगा। लेकिन अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ भी नहीं होता — यदि अल्लाह चाहे तो किसी आयत को भुला दे या उसे मंसूख (रद्द) कर दे, और यह उसकी हिकमत (बुद्धिमत्ता) से होता है, किसी ऐसी मसलहत (भलाई) के लिए जिसे वही जानता है। यह कोई कमी नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत और उसकी योजना का हिस्सा है, ताकि शरीयत हर दौर और हर हालत के लिए बेहतरीन रास्ता दिखा सके।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "वह जानता है जो खुला है और जो छिपा है।" यानी अल्लाह तआला को हर चीज़ का पूरा इल्म है — चाहे वह ज़बान से कही जाए, किसी काम में दिखे, या दिल में छिपी हो, या रात की अंधेरी में की जाए। उससे कुछ भी पोशीदा (छिपा) नहीं है। यह बात हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है कि हम जहाँ भी हों, जो भी करें, अल्लाह हमें देख रहा है और हमारे इरादों को जानता है। इसलिए हमें चाहिए कि अपने अंदर और बाहर दोनों को सही रखें — नेक इरादे रखें, अच्छे काम करें, और याद रखें कि अल्लाह की नज़र से कोई चीज़ नहीं बच सकती।
यह आयत हमें तसल्ली देती है कि अल्लाह का इल्म असीम है, और उसकी हर मर्ज़ी में भलाई है। जब हम यह जान लें कि अल्लाह हमारे ज़ाहिर और बातिन (बाहरी और भीतरी) सब कुछ जानता है, तो हमारा दिल उसकी इबादत में लग जाता है, और हम उसकी रहमत की उम्मीद रखते हुए उसके हुक्मों पर चलते हैं। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अल्लाह के बताए रास्ते पर चलें, उसकी मर्ज़ी पर राज़ी रहें, और उससे डरते हुए भी उसकी रहमत की आस लगाए रखें। क़ुरआन हमारे लिए रहनुमा है, और अल्लाह का वादा है कि वह हमें समझाएगा और भुलाने से बचाएगा, बशर्ते हम उसकी किताब को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें।
📜 आयत 5-9 — सूरा अल-आला
अनुवाद — अल-आला 7
सूरा अल-आला आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जो ख़ुदा चाहे (मन्सूख़ कर दे) बेशक वह खुली…सूरा आयत 7/19 — सूरा अल-आला الأعلى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आला सुनें, सूरा अल-आला अनुवाद, सूरा अल-आला mp3, सूरा अल-आला pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


