अल-हिज्र · 40/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَصِينَ ۝٤٠
Illaa `ibaadaka minhumul mukhlaseen
📖 हिंदी अर्थ
मगर उनमें से तेरे निरे खुरे ख़ास बन्दे (कि वह मेरे बहकाने में न आएँगें)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِلَّا: सिवाय, परन्तु
  • عِبَادَكَ: आपके (अल्लाह के) बन्दे
  • مِنْهُمُ: उनमें से
  • الْمُخْلَصِينَ: जिन्हें आपने (अल्लाह ने) अपनी इबादत के लिए ख़ालिस और चुनिंदा कर लिया हो

तफ़सीर:

इस आयत में शैतान (इब्लीस) की उस बात का उल्लेख जारी है जो उसने अल्लाह से कही थी। शैतान ने अल्लाह की क़सम खाकर प्रतिज्ञा की थी कि वह आदम की सन्तान को गुमराह करेगा और उन्हें सीधे मार्ग से भटकाएगा। लेकिन उसने अपनी इस प्रतिज्ञा से एक समूह को अलग कर दिया — वे बन्दे जिन्हें अल्लाह ने अपनी विशेष कृपा से चुन लिया है और उनके ईमान व अमल को ख़ालिस कर दिया है। ये वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी तौहीद (एकेश्वरवाद) के लिए विशेष रूप से चुना है, उन्हें हिदायत दी है और उनके दिलों को अपनी इबादत के लिए पाक व साफ़ कर दिया है। शैतान जानता है कि उसका वश इन पर नहीं चलता, क्योंकि ये अल्लाह की रक्षा में हैं और उनकी निय्यत व आस्था में कोई कमी नहीं है। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने आपको पूरी तरह अल्लाह के हवाले कर दिया है और उनके अंदर शैतान की कोई पैठ नहीं बन पाती।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की मज़बूती और अमल की ख़ुलूस (निष्ठा) ही वह ढाल है जो शैतान के हमलों से बचाती है। जो लोग अपने दिल को अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लेते हैं, शैतान उनके पास फटकने की हिम्मत नहीं करता।
  2. अल्लाह की रहमत और हिदायत ही सबसे बड़ी नेमत है — जिसे अल्लाह चाहता है, उसे मुख़लिस (ख़ालिस) बना देता है और उसे शैतान के कुचक्रों से महफ़ूज़ रखता है।
  3. यह आयत मुसलमानों को उम्मीद देती है कि भले ही शैतान का दुश्मनी भरा इरादा पूरी इंसानियत के लिए है, लेकिन अल्लाह के नेक बन्दों के लिए कोई ख़तरा नहीं — बशर्ते वे सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करें और उसी पर भरोसा रखें।
  4. इससे हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने अमल को सिर्फ अल्लाह के लिए करना चाहिए, रिया (दिखावे) से बचना चाहिए, ताकि हम भी उन मुख़लिस बन्दों में शामिल हो सकें जिनके बारे में शैतान ने खुद कहा कि उन पर उसका कुछ नहीं चलेगा।
🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — अल-हिज्र

38إِلَىٰ يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ
के दिन तक तुझे मोहलत दी गई
39قَالَ رَبِّ بِمَا أَغْوَيْتَنِي لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِي الْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ
उन शैतान ने कहा ऐ मेरे परवरदिगार चूंकि तूने मुझे रास्ते से अलग किया मैं भी उनके लिए दुनिया में (साज़ व सामान को) उम्दा कर दिखाऊँगा और सबको ज़रुर बहकाऊगा
40إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ الْمُخْلَصِينَ
मगर उनमें से तेरे निरे खुरे ख़ास बन्दे (कि वह मेरे बहकाने में न आएँगें)
41قَالَ هَٰذَا صِرَاطٌ عَلَيَّ مُسْتَقِيمٌ
ख़ुदा ने फरमाया कि यही राह सीधी है कि मुझ तक (पहुँचती) है
42إِنَّ عِبَادِي لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَانٌ إِلَّا مَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْغَاوِينَ
जो मेरे मुख़लिस (ख़ास बन्दे) बन्दे हैं उन पर तुझसे किसी तरह की हुकूमत न होगी मगर हाँ गुमराहों में से जो तेरी पैरवी करे (उस पर तेरा वार चल जाएगा)
अल-हिज्रकुरान सूची
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अनुवाद — अल-हिज्र 40

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Tuesday, August 18, 2026

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