अल-हिज्र · 70/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
قَالُوا أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَمِينَ ۝٧٠
Qaalooo awalam nanhaka `anil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहने लगे क्यों जी हमने तुम को सारे जहाँन के लोगों (के आने) की मनाही नहीं कर दी थी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوَلَمْ نَنْهَكَ: क्या हमने तुम्हें मना नहीं किया था?
  • عَنِ الْعَالَمِينَ: सारे लोगों (को पनाह देने) से। यहाँ "العالمين" से आशय उन सभी लोगों से है जो उनके शहर से गुज़रते थे।

तफ़सीर:

जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम की बुराइयों का विरोध किया और उन्हें रोका, तो उनकी क़ौम ने उनसे कहा: "क्या हमने तुम्हें मना नहीं किया था कि तुम किसी भी आने-जाने वाले को पनाह न दो, उसे अपने पास न रखो और उसकी मेहमाननवाज़ी न करो?" यह बात उन्होंने इसलिए कही क्योंकि उनकी क़ौम में बुरी फ़ितरत (प्रवृत्ति) थी और वे आने-जाने वाले मुसाफ़िरों के साथ बुरे काम करते थे। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) जब भी किसी मुसाफ़िर को देखते, तो उसे अपनी पनाह में ले लेते और उन बुरे लोगों से बचाते थे। इसलिए उनकी क़ौम ने उन्हें इस काम से रोका था और अब जब उन्होंने फिर से मेहमानों को पनाह दी, तो उन्होंने नाराज़गी और डाँट के साथ यह बात कही।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से पता चलता है कि नेक और सच्चे लोग हमेशा बुराई के खिलाफ खड़े होते हैं, चाहे उन्हें कितनी भी मुश्किलों का सामना करना पड़े। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के दबाव के बावजूद सच्चाई और अच्छाई का साथ नहीं छोड़ा।
  2. मेहमाननवाज़ी और दूसरों की मदद करना एक बहुत बड़ा गुण है, और यह अल्लाह के नेक बंदों की पहचान है। हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने इस गुण को अपनाया और अपनी क़ौम के विरोध के बावजूद उस पर क़ायम रहे।
  3. बुराई और अश्लीलता को रोकना और उसके खिलाफ आवाज़ उठाना हर नेक इंसान का फ़र्ज़ है, चाहे इसके लिए उसे कितनी ही तकलीफें क्यों न उठानी पड़ें।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम किसी नेक काम पर हों, तो लोगों की बातों और डाँट-फटकार से नहीं डरना चाहिए, बल्कि अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) को सामने रखकर काम करते रहना चाहिए।


📜 आयत 68-72 — अल-हिज्र

68قَالَ إِنَّ هَٰؤُلَاءِ ضَيْفِي فَلَا تَفْضَحُونِ
लूत ने (उनसे कहा) कि ये लोग मेरे मेहमान है तो तुम (इन्हें सताकर) मुझे रुसवा बदनाम न करो
69وَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ
और ख़ुदा से डरो और मुझे ज़लील न करो
70قَالُوا أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَمِينَ
वह लोग कहने लगे क्यों जी हमने तुम को सारे जहाँन के लोगों (के आने) की मनाही नहीं कर दी थी
71قَالَ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ
लूत ने कहा अगर तुमको (ऐसा ही) करना है तो ये मेरी क़ौम की बेटियाँ मौजूद हैं
72لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ
(इनसे निकाह कर लो) ऐ रसूल तुम्हारी जान की कसम ये लोग (क़ौम लूत) अपनी मस्ती में मदहोश हो रहे थे
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अनुवाद — अल-हिज्र 70

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Tuesday, August 18, 2026

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