अल-हिज्र · 71/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
قَالَ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ ۝٧١
Qaala haaa`ulaaa`i banaateee in kuntum faa`ileen
📖 हिंदी अर्थ
लूत ने कहा अगर तुमको (ऐसा ही) करना है तो ये मेरी क़ौम की बेटियाँ मौजूद हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

कठिन शब्दों के अर्थ:

  • بَنَاتِي: मेरी बेटियाँ (अर्थात् मेरी क़ौम की औरतें, क्योंकि नबी अपनी उम्मत के लिए पिता के समान होता है)
  • فَاعِلِينَ: करने वाले (अर्थात् अपनी इच्छा पूरी करने का इरादा रखने वाले)

आयत की व्याख्या:

जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि उनकी क़ौम के लोग बुरे इरादे से उनके मेहमानों (फ़रिश्तों) की तरफ बढ़ रहे हैं, तो उन्होंने अपनी क़ौम को समझाने और उन्हें गुनाह से रोकने के लिए कहा: "ये मेरी बेटियाँ हैं" — यानी मेरी क़ौम की औरतें, जो तुम्हारे लिए हलाल हैं। अगर तुम्हें अपनी इच्छा पूरी करनी ही है, तो इनसे निकाह करके हलाल तरीक़े से अपनी ज़रूरत पूरी करो, और उस घिनौने काम (लिवात) से बाज़ आओ जो अल्लाह ने हराम किया है।

यहाँ "बेटियाँ" कहने का मतलब यह था कि नबी अपनी उम्मत के लिए पिता की मिसाल होता है, इसलिए उन्होंने अपनी क़ौम की औरतों को अपनी बेटियाँ कहकर उन्हें हलाल रिश्ते की तरफ बुलाया। उन्होंने यह पेशकश इसलिए की ताकि लोग हराम के रास्ते को छोड़कर हलाल की तरफ आएँ, और यह उनकी शफ़्क़त और नसीहत का सबूत है। लेकिन उनकी क़ौम ने यह कहकर इनकार कर दिया कि "तुम्हें तो मालूम है कि हमें तुम्हारी बेटियों से कोई मतलब नहीं" — यानी उनका इरादा सिर्फ़ बुराई का था।

आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ और फ़ायदे:

  1. नबी और उम्मत का रिश्ता पिता और बेटे जैसा है — नबी अपनी उम्मत की भलाई के लिए हर मुमकिन क़ुर्बानी देता है।
  2. गुनाह से बचाने के लिए हलाल रास्ता दिखाना सबसे बड़ी नसीहत है — इंसान को चाहिए कि हराम से रोकते हुए हलाल का रास्ता भी बताए।
  3. नेक इंसान मुसीबत के वक़्त भी दूसरों की हिदायत की फ़िक्र करता है, चाहे सामने वाले उसकी बात न मानें।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि शर्म और हया का दामन थामे रहना चाहिए, और बुराई को अच्छाई से दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।
  5. अल्लाह के नबियों की सीरत से हमें सबक़ मिलता है कि कितनी भी बड़ी मुसीबत आए, हक़ बोलना और नेकी की तरफ बुलाना नहीं छोड़ना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 69-73 — अल-हिज्र

69وَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ
और ख़ुदा से डरो और मुझे ज़लील न करो
70قَالُوا أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَمِينَ
वह लोग कहने लगे क्यों जी हमने तुम को सारे जहाँन के लोगों (के आने) की मनाही नहीं कर दी थी
71قَالَ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ
लूत ने कहा अगर तुमको (ऐसा ही) करना है तो ये मेरी क़ौम की बेटियाँ मौजूद हैं
72لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ
(इनसे निकाह कर लो) ऐ रसूल तुम्हारी जान की कसम ये लोग (क़ौम लूत) अपनी मस्ती में मदहोश हो रहे थे
73فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ
(लूत की सुनते काहे को) ग़रज़ सूरज निकलते निकलते उनको (बड़े ज़ोरो की) चिघाड़ न ले डाला
अल-हिज्रकुरान सूची
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अनुवाद — अल-हिज्र 71

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Tuesday, August 18, 2026

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