अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَاتَّقُوا اللَّهَ: अल्लाह से डरो और उसकी अवज्ञा से बचो।
- وَلَا تُخْزُونِ: मुझे अपमानित मत करो, मुझे रुसवा मत करो।
तफ़सीर:
हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: ये लोग मेरे मेहमान हैं और मेरी पनाह में हैं। इन्हें छेड़ना मेरे लिए बड़ी रुसवाई और ज़िल्लत का कारण होगा। इसलिए अल्लाह से डरो और उसकी नाफ़रमानी से बचो, और इस घिनौने काम (बदकारी) से इन्हें न छेड़ो, वरना तुम मुझे अपमानित कर दोगे। क्योंकि जिस इंसान के मेहमान की बेइज़्ज़ती की जाए, उसकी अपनी बेइज़्ज़ती होती है। यह नसीहत उन्होंने इसलिए की ताकि वे अल्लाह के अज़ाब से डरें और अपनी शर्मनाक हरकत से बाज़ आएँ।
फ़ायदे:
- मेहमान की इज़्ज़त करना और उसकी हिफ़ाज़त करना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है, और यह नेकी का बड़ा काम है।
- अल्लाह का डर इंसान को बुरे कामों से रोकता है और समाज में अमन व सलामती लाता है।
- किसी की बेइज़्ज़ती करना, ख़ासकर नेक और मेहमान लोगों की, अल्लाह के अज़ाब का सबब बनता है।
- पैग़म्बरों की शान और उनकी उम्मत की हिफ़ाज़त अल्लाह के करीब होने का ज़रिया है।
📜 आयत 67-71 — अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 69
सूरा अल-हिज्र आयत 69 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा से डरो और मुझे ज़लील न करोसूरा आयत 69/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 67–71. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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