अल-हिज्र · 72/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ ۝٧٢
La`amruka innahum lafee sakratihim ya`mahoon
📖 हिंदी अर्थ
(इनसे निकाह कर लो) ऐ रसूल तुम्हारी जान की कसम ये लोग (क़ौम लूत) अपनी मस्ती में मदहोश हो रहे थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَعَمْرُكَ: तुम्हारी ज़िंदगी की क़सम, यानी तुम्हारी हयात की क़सम।
  • سَكْرَتِهِمْ: उनकी ग़लती, बेहोशी, या अपनी इच्छाओं के नशे में डूबे होने की हालत।
  • يَعْمَهُونَ: भटकते हैं, सरासर हैरान और परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहते हैं।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ की ज़िंदगी की क़सम खाई है, जो उनके महान सम्मान और रुत्बे की दलील है। अल्लाह ने किसी और इंसान की ज़िंदगी की क़सम नहीं खाई, सिर्फ आप ﷺ की हयात की क़सम खाई, क्योंकि आप सारी मख़लूक़ात में सबसे अफ़ज़ल और अज़ीज़ हैं। इस क़सम के बाद अल्लाह फ़रमाता है कि हज़रत लूत की क़ौम अपनी शहवतों और बुरी इच्छाओं के नशे में डूबी हुई थी, और उसी बेहोशी और ग़लती की हालत में वह भटक रही थी। वह अपनी हरकतों की हक़ीक़त को समझ नहीं पा रही थी, और हद से गुज़र चुकी थी। यह उनकी सज़ा का ऐलान था कि उन पर अज़ाब आकर रहेगा, और ऐसा ही हुआ — सूरज निकलते वक़्त उन पर अज़ाब का सैलाब आ गया।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें नबी ﷺ की मुहब्बत और अज़मत का एहसास होता है कि अल्लाह ने खुद उनकी ज़िंदगी की क़सम खाई, जो उनके दर्जे की बुलंदी को ज़ाहिर करती है। यह हमारे लिए उनकी पैरवी और सुन्नत पर अमल की तरग़ीब है।
  2. इंसान को चाहिए कि वह अपनी इच्छाओं और शहवतों के पीछे अंधा न हो, क्योंकि यही वह चीज़ है जो इंसान को हक़ से भटका कर तबाही की तरफ ले जाती है।
  3. अल्लाह की क़समें उसकी मख़लूक़ात की अहमियत को उजागर करती हैं, और हमें सिखाती हैं कि हमें भी अल्लाह की नेमतों और उसके प्यारे नबी ﷺ की मुहब्बत को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाना चाहिए।
  4. गुनाह पर अड़े रहना और उसमें मज़े लेना अल्लाह के अज़ाब को दावत देना है, इसलिए हमें हर हाल में तौबा और इस्तिग़फ़ार का रास्ता अपनाना चाहिए।


📜 आयत 70-74 — अल-हिज्र

70قَالُوا أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَمِينَ
वह लोग कहने लगे क्यों जी हमने तुम को सारे जहाँन के लोगों (के आने) की मनाही नहीं कर दी थी
71قَالَ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ
लूत ने कहा अगर तुमको (ऐसा ही) करना है तो ये मेरी क़ौम की बेटियाँ मौजूद हैं
72لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ
(इनसे निकाह कर लो) ऐ रसूल तुम्हारी जान की कसम ये लोग (क़ौम लूत) अपनी मस्ती में मदहोश हो रहे थे
73فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ
(लूत की सुनते काहे को) ग़रज़ सूरज निकलते निकलते उनको (बड़े ज़ोरो की) चिघाड़ न ले डाला
74فَجَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ
फिर हमने उसी बस्ती को उलट कर उसके ऊपर के तबके क़ो नीचे का तबक़ा बना दिया और उसके ऊपर उन पर खरन्जे के पत्थर बरसा दिए इसमें शक़ नहीं कि इसमें (असली बात के) ताड़ जाने वालों के लिए (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
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अनुवाद — अल-हिज्र 72

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Tuesday, August 18, 2026

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