अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَعَمْرُكَ: तुम्हारी ज़िंदगी की क़सम, यानी तुम्हारी हयात की क़सम।
- سَكْرَتِهِمْ: उनकी ग़लती, बेहोशी, या अपनी इच्छाओं के नशे में डूबे होने की हालत।
- يَعْمَهُونَ: भटकते हैं, सरासर हैरान और परेशान होकर इधर-उधर भटकते रहते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ की ज़िंदगी की क़सम खाई है, जो उनके महान सम्मान और रुत्बे की दलील है। अल्लाह ने किसी और इंसान की ज़िंदगी की क़सम नहीं खाई, सिर्फ आप ﷺ की हयात की क़सम खाई, क्योंकि आप सारी मख़लूक़ात में सबसे अफ़ज़ल और अज़ीज़ हैं। इस क़सम के बाद अल्लाह फ़रमाता है कि हज़रत लूत की क़ौम अपनी शहवतों और बुरी इच्छाओं के नशे में डूबी हुई थी, और उसी बेहोशी और ग़लती की हालत में वह भटक रही थी। वह अपनी हरकतों की हक़ीक़त को समझ नहीं पा रही थी, और हद से गुज़र चुकी थी। यह उनकी सज़ा का ऐलान था कि उन पर अज़ाब आकर रहेगा, और ऐसा ही हुआ — सूरज निकलते वक़्त उन पर अज़ाब का सैलाब आ गया।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें नबी ﷺ की मुहब्बत और अज़मत का एहसास होता है कि अल्लाह ने खुद उनकी ज़िंदगी की क़सम खाई, जो उनके दर्जे की बुलंदी को ज़ाहिर करती है। यह हमारे लिए उनकी पैरवी और सुन्नत पर अमल की तरग़ीब है।
- इंसान को चाहिए कि वह अपनी इच्छाओं और शहवतों के पीछे अंधा न हो, क्योंकि यही वह चीज़ है जो इंसान को हक़ से भटका कर तबाही की तरफ ले जाती है।
- अल्लाह की क़समें उसकी मख़लूक़ात की अहमियत को उजागर करती हैं, और हमें सिखाती हैं कि हमें भी अल्लाह की नेमतों और उसके प्यारे नबी ﷺ की मुहब्बत को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बनाना चाहिए।
- गुनाह पर अड़े रहना और उसमें मज़े लेना अल्लाह के अज़ाब को दावत देना है, इसलिए हमें हर हाल में तौबा और इस्तिग़फ़ार का रास्ता अपनाना चाहिए।
📜 आयत 70-74 — अल-हिज्र
अनुवाद — अल-हिज्र 72
सूरा अल-हिज्र आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (इनसे निकाह कर लो) ऐ रसूल तुम्हारी जान की कसम…सूरा आयत 72/99 — अल-हिज्र الحجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हिज्र सुनें, अल-हिज्र अनुवाद, अल-हिज्र mp3, अल-हिज्र pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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