अश-शुआरा · 100/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
فَمَا لَنَا مِن شَافِعِينَ ۝١٠٠
Famaa lanaa min shaa fi`een
📖 हिंदी अर्थ
तो अब तो न कोई (साहब) मेरी सिफारिश करने वाले हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شافِعِينَ: सिफ़ारिश करने वाले, वकालत करने वाले।

तफ़सीर:

यह आयत उस हालत का वर्णन कर रही है जो क़यामत के दिन मुशरिकों (बुतपरस्तों) की होगी। जब वे अपने आगे जहन्नम की आग देखेंगे और अपने किए पर पछताएँगे, तो वे कहेंगे: "अब हमारे लिए कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं है।" यानी उस दिन न तो कोई उनके लिए सिफ़ारिश करेगा, न ही कोई उन्हें अज़ाब से बचाने वाला होगा।

इसका मतलब यह भी है कि दुनिया में जिन्हें वे अपना सहारा और मददगार समझते थे—चाहे वे बुत हों, देवता हों, या बड़े-बड़े लोग—उनमें से कोई भी उस दिन उनके काम नहीं आएगा। न कोई उनसे मुहब्बत की बिना पर सिफ़ारिश करेगा, न ही कोई उन पर रहम खाकर उन्हें अज़ाब से बचाने की कोशिश करेगा।

यह उन लोगों का हाल है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के साथ किसी और को शरीक ठहराया और उनसे मदद की उम्मीद लगाई। क़यामत के दिन जब सारे पर्दे उठ जाएँगे, तो उन्हें साफ़ दिख जाएगा कि उनकी सारी उम्मीदें बेकार थीं, और उनके लिए कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं बचा।

यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम उस दिन से पहले अपने रिश्ते को अल्लाह के साथ सही कर लें। अल्लाह के सिवा किसी से मदद की उम्मीद न रखें, और उसकी रहमत और मग़फिरत के तलबगार रहें। जो लोग दुनिया में अल्लाह के साथ अच्छा रिश्ता रखते हैं, उनके लिए क़यामत के दिन सिफ़ारिश का ज़रिया होगा—पैग़म्बरों, शहीदों और नेक लोगों की सिफ़ारिश। लेकिन जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया और उसकी नाफ़रमानी में ज़िंदगी गुज़ारी, उनके लिए उस दिन कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा।

आओ, हम इस आयत से सबक लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि उस दिन हम उन लोगों में से न हों जो कहेंगे: "हमारे लिए कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं है।" बल्कि हम उन लोगों में से हों जिनके लिए सिफ़ारिश की जाएगी और जिन्हें जहन्नम से नजात मिलेगी। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 98-102 — अश-शुआरा

98إِذْ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ الْعَالَمِينَ
कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा) के बराबर समझते रहे
99وَمَا أَضَلَّنَا إِلَّا الْمُجْرِمُونَ
और हमको बस (उन) गुनाहगारों ने (जो मुझसे पहले हुए) गुमराह किया
100فَمَا لَنَا مِن شَافِعِينَ
तो अब तो न कोई (साहब) मेरी सिफारिश करने वाले हैं
101وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٍ
और न कोई दिलबन्द दोस्त हैं
102فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
तो काश हमें अब दुनिया में दोबारा जाने का मौक़ा मिलता तो हम (ज़रुर) ईमान वालों से होते
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अनुवाद — अश-शुआरा 100

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Tuesday, August 18, 2026

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