अश-शुआरा · 54/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَشِرْذِمَةٌ قَلِيلُونَ ۝٥٤
Inna haaa`ulaaa`i lashir zimatun qaleeloon
📖 हिंदी अर्थ
(और कहा) कि ये लोग मूसा के साथ बनी इसराइल थोड़ी सी (मुट्ठी भर की) जमाअत हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • शिर्ज़िमा (شِرْذِمَةٌ): छोटा समूह, तुच्छ और कमज़ोर गिरोह।
  • क़लीलून (قَلِيلُونَ): बहुत कम संख्या में, थोड़े से लोग।

व्याख्या:

फ़िरऔन ने अपने दरबारियों से मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथ निकले बनी इसराइल के बारे में घमंड और अहंकार के साथ कहा कि ये लोग जो हमारे सामने खड़े हैं और हमें चुनौती दे रहे हैं, ये तो बस एक छोटा सा, तुच्छ और बहुत कम संख्या वाला गिरोह है। फ़िरऔन ने उन्हें कमज़ोर और हक़ीर समझा, क्योंकि उसकी नज़र में ताक़त और अज़मत सिर्फ़ संख्या और सांसारिक साधनों में थी। वह यह भी बताना चाहता था कि इन लोगों का हमारे मुक़ाबले में कोई वज़न नहीं, न इनके पास सैन्य शक्ति है और न ही कोई सहारा।

लेकिन यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि सच्ची ताक़त अल्लाह पर भरोसे में है, संख्या और साधनों में नहीं। इतिहास गवाह है कि अल्लाह ने कम संख्या वाले सच्चे ईमानवालों को बड़ी से बड़ी ताक़तों पर ग़ालिब किया है। फ़िरऔन का यह कथन उसके अहंकार और अल्लाह की क़ुदरत से बेख़बरी का सबूत था, और अल्लाह ने उसे उसी अहंकार के कारण हलाक कर दिया।

यह क़िस्सा हमारे लिए सबक़ है कि हमें कभी भी अल्लाह के दीन की कमज़ोर दिखने वाली जमात को हक़ीर नहीं समझना चाहिए। अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है, चाहे वे संख्या में कितने ही कम क्यों न हों। जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें हर मुश्किल से निकालता है और हमारी कमज़ोरी को ताक़त में बदल देता है। यही ईमान की असली ताक़त है — कि हम अल्लाह पर यक़ीन रखें और उसके रास्ते में डटे रहें, चाहे दुनिया हमें कितना भी कमज़ोर क्यों न समझे।



📜 आयत 52-56 — सूरा अश-शुआरा

52۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
और हमने मूसा के पास वही भेजी कि तुम मेरे बन्दों को लेकर रातों रात निकल जाओ क्योंकि तुम्हारा पीछा किया जाएगा
53فَأَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ
तब फिरऔन ने (लश्कर जमा करने के ख्याल से) तमाम शहरों में (धड़ा धड़) हरकारे रवाना किए
54إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَشِرْذِمَةٌ قَلِيلُونَ
(और कहा) कि ये लोग मूसा के साथ बनी इसराइल थोड़ी सी (मुट्ठी भर की) जमाअत हैं
55وَإِنَّهُمْ لَنَا لَغَائِظُونَ
और उन लोगों ने हमें सख्त गुस्सा दिलाया है
56وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَاذِرُونَ
और हम सबके सब बा साज़ों सामान हैं
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
54आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 54

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सूरा आयत 54/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.





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Saturday, October 3, 2026

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