अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- शिर्ज़िमा (شِرْذِمَةٌ): छोटा समूह, तुच्छ और कमज़ोर गिरोह।
- क़लीलून (قَلِيلُونَ): बहुत कम संख्या में, थोड़े से लोग।
व्याख्या:
फ़िरऔन ने अपने दरबारियों से मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथ निकले बनी इसराइल के बारे में घमंड और अहंकार के साथ कहा कि ये लोग जो हमारे सामने खड़े हैं और हमें चुनौती दे रहे हैं, ये तो बस एक छोटा सा, तुच्छ और बहुत कम संख्या वाला गिरोह है। फ़िरऔन ने उन्हें कमज़ोर और हक़ीर समझा, क्योंकि उसकी नज़र में ताक़त और अज़मत सिर्फ़ संख्या और सांसारिक साधनों में थी। वह यह भी बताना चाहता था कि इन लोगों का हमारे मुक़ाबले में कोई वज़न नहीं, न इनके पास सैन्य शक्ति है और न ही कोई सहारा।
लेकिन यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि सच्ची ताक़त अल्लाह पर भरोसे में है, संख्या और साधनों में नहीं। इतिहास गवाह है कि अल्लाह ने कम संख्या वाले सच्चे ईमानवालों को बड़ी से बड़ी ताक़तों पर ग़ालिब किया है। फ़िरऔन का यह कथन उसके अहंकार और अल्लाह की क़ुदरत से बेख़बरी का सबूत था, और अल्लाह ने उसे उसी अहंकार के कारण हलाक कर दिया।
यह क़िस्सा हमारे लिए सबक़ है कि हमें कभी भी अल्लाह के दीन की कमज़ोर दिखने वाली जमात को हक़ीर नहीं समझना चाहिए। अल्लाह की मदद उसके सच्चे बंदों के साथ होती है, चाहे वे संख्या में कितने ही कम क्यों न हों। जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें हर मुश्किल से निकालता है और हमारी कमज़ोरी को ताक़त में बदल देता है। यही ईमान की असली ताक़त है — कि हम अल्लाह पर यक़ीन रखें और उसके रास्ते में डटे रहें, चाहे दुनिया हमें कितना भी कमज़ोर क्यों न समझे।
📜 आयत 52-56 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 54
सूरा अश-शुआरा आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और कहा) कि ये लोग मूसा के साथ बनी इसराइल…सूरा आयत 54/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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