अस-साफ्फात · 160/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ ۝١٦٠
Illaa `ibaadal laahil mukhlaseen
📖 हिंदी अर्थ
मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَّا: सिवाय, के अलावा
  • عِبَادَ اللَّهِ: अल्लाह के बंदे
  • الْمُخْلَصِينَ: जिन्हें अल्लाह ने ख़ालिस (शुद्ध) कर लिया हो — यानी वे लोग जिनकी नीयत, ईमान और इबादत को अल्लाह ने हर तरह के शिर्क और रियाकारी से पाक कर दिया हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने पवित्र बंदों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिन्हें उन्होंने ख़ालिस कर लिया है — यानी उनके दिलों को शिर्क, रियाकारी और बुरे ख़यालात से पाक कर दिया है। ये वे लोग हैं जो अल्लाह की इबादत में सिर्फ़ उसी की रज़ा चाहते हैं, और किसी और का ख़याल उनके दिल में नहीं होता।

ये मुख़लिस बंदे अल्लाह के बारे में वही बातें कहते हैं जो उसकी शान और अज़मत के लायक़ हैं। वे अल्लाह को उसकी बुलंद सिफ़ात (गुणों) और कमाल की ख़ूबियों के साथ याद करते हैं — जैसे वह रहमान है, रहीम है, मालिक है, क़ुद्दूस है, सलाम है। वे अल्लाह के लिए कभी कोई ऐसी बात नहीं कहते जो उसकी पाकी और बुज़ुर्गी के ख़िलाफ़ हो, न ही उसके लिए कोई साथी या औलाद क़रार देते हैं, और न ही उसकी सिफ़ात में कोई कमी लाते हैं।

यह आयत पहले की आयतों का जवाब है, जहाँ मुशरिकीन अल्लाह के बारे में बुरी बातें कहते थे — जैसे यह कहना कि अल्लाह और जिन्नात के बीच रिश्ता है, या अल्लाह की औलाद है। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि ये सब बातें झूठ हैं, और इन बुरी बातों से अल्लाह की ज़ात पाक है। लेकिन अल्लाह के मुख़लिस बंदे इन सब बातों से बिल्कुल अलग हैं — वे अल्लाह की तारीफ़ सिर्फ़ उसी तरीक़े से करते हैं जो उसके लायक़ है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के करीब होने का सबसे बड़ा ज़रिया इख़लास (ख़ालिस नीयत) है। जब हमारा दिल अल्लाह के लिए ख़ालिस हो जाता है, तो हमारी ज़ुबान भी सिर्फ़ वही बोलती है जो अल्लाह को पसंद है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को शिर्क, रियाकारी और बुरे ख़यालात से पाक करें, ताकि हम भी उन मुख़लिस बंदों में शामिल हो सकें जिनका ज़िक्र अल्लाह ने क़ुरआन में इज़्ज़त के साथ किया है। याद रखें — अल्लाह की मोहब्बत और उसकी रज़ा ही हमारी कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 158-162 — सूरा अस-साफ्फात

158وَجَعَلُوا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ الْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ
और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे
159سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो बातें बनाया करते हैं इनसे खुदा पाक साफ़ है
160إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर खुदा के निरे खरे बन्दे (ऐसा नहीं कहते)
161فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ
ग़रज़ तुम लोग खुद और तुम्हारे माबूद
162مَا أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَاتِنِينَ
उसके ख़िलाफ (किसी को) बहका नहीं सकते
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
160आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 160

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Saturday, October 3, 2026

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