अल-हिज्र · 62/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ ۝٦٢
Qaala innakum qawmum munkaroon
📖 हिंदी अर्थ
फरिश्तों ने कहा (नहीं) बल्कि हम तो आपके पास वह (अज़ाब) लेकर आए हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَالَ (क़ाला): कहा
  • إِنَّكُمْ (इन्नकुम): बेशक तुम
  • قَوْمٌ (क़ौम): लोग, जाति
  • مُنكَرُونَ (मुन्करून): अनजान, अपरिचित, जिन्हें पहचाना न जा सके

आयत का विस्तृत विवरण:

जब अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते (जो मेहमान की सूरत में आए थे) हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) के पास पहुँचे, तो हज़रत लूत ने उन्हें देखकर कहा: "बेशक तुम ऐसे लोग हो जो मुझे अनजान और अपरिचित लग रहे हो।" अर्थात्, हज़रत लूत ने उन्हें पहचाना नहीं, क्योंकि वे उनके शहर के निवासी नहीं थे और उनके चेहरे उनसे परिचित नहीं थे। यह बात उन्होंने इसलिए कही ताकि वे अपना परिचय दें और बताएँ कि वे कौन हैं। साथ ही, हज़रत लूत को इस बात की चिंता भी थी कि यदि उनके शहर के बुरे लोगों को इन मेहमानों के बारे में पता चल गया, तो वे उन्हें नुक़सान पहुँचा सकते हैं, क्योंकि वहाँ के लोग बुरे कामों में मशहूर थे। यह आयत हज़रत लूत की मेहमाननवाज़ी और उनकी चिंता को दर्शाती है, और यह भी बताती है कि फ़रिश्ते इंसानी सूरत में आए थे।

आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ और लाभ:

  1. मेहमाननवाज़ी की अहमियत: हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अनजान मेहमानों को देखकर उनका स्वागत किया और उनकी ख़ातिर की। यह हमें सिखाता है कि मेहमानों का सम्मान करना और उनकी देखभाल करना इस्लाम की पवित्र शिक्षा है।
  2. अच्छे इंसान की पहचान: हज़रत लूत का यह अंदाज़ बताता है कि एक नेक इंसान हमेशा दूसरों की भलाई के बारे में सोचता है और अपने मेहमानों की हिफ़ाज़त के लिए चिंतित रहता है।
  3. अल्लाह की मदद: जब इंसान अल्लाह के नेक बंदों पर मुसीबत आती है, तो अल्लाह उनकी मदद के लिए अपने फ़रिश्ते भेजता है, जैसा कि उसने हज़रत लूत के पास फ़रिश्ते भेजे। यह हमें यक़ीन दिलाता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
  4. बुराई से दूर रहने की तरग़ीब: यह आयत उस बुरे समाज की ओर इशारा करती है जिसमें हज़रत लूत रहते थे, और हमें सिखाती है कि हमें हमेशा अच्छाई और पाकीज़गी की राह पर चलना चाहिए और बुराई से दूर रहना चाहिए।


📜 आयत 60-64 — सूरा अल-हिज्र

60إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَا ۙ إِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِرِينَ
कि वह ज़रुर (अपने लड़के बालों के) पीछे (अज़ाब में) रह जाएगी
61فَلَمَّا جَاءَ آلَ لُوطٍ الْمُرْسَلُونَ
ग़रज़ जब (ख़ुदा के) भेजे हुए (फरिश्ते) लूत के बाल बच्चों के पास आए तो लूत ने कहा कि तुम तो (कुछ) अजनबी लोग (मालूम होते हो)
62قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ
फरिश्तों ने कहा (नहीं) बल्कि हम तो आपके पास वह (अज़ाब) लेकर आए हैं
63قَالُوا بَلْ جِئْنَاكَ بِمَا كَانُوا فِيهِ يَمْتَرُونَ
जिसके बारे में आपकी क़ौम के लोग शक़ रखते थे
64وَأَتَيْنَاكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ
(कि आए न आए) और हम आप के पास (अज़ाब का) कलई (सही) हुक्म लेकर आए हैं और हम बिल्कुल सच कहते हैं
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
62आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 62

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Friday, October 2, 2026

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