Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا لَكُمْ: तुम्हें क्या हो गया? / तुम्हारा क्या हाल है?
- لَا تَنطِقُونَ: तुम बोलते नहीं हो, तुम जवाब नहीं देते।
व्याख्या:
जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के बुतों (मूर्तियों) को देखा, जिनके सामने खाना रखा गया था, तो उन्होंने उनसे मज़ाक़िया अंदाज़ में कहा: "क्या तुम खाते नहीं हो?" फिर जब उनसे कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने कहा: "तुम्हें क्या हो गया है कि तुम बोलते नहीं हो?"
यह एक बहुत ही स्पष्ट और तर्कपूर्ण प्रश्न था। ये मूर्तियाँ न तो खा सकती थीं, न बोल सकती थीं, न सुन सकती थीं, न किसी को नुकसान या फ़ायदा पहुँचा सकती थीं। फिर इन्हें पूजा जाए? यह कैसी बुद्धिमानी है?
हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को यह समझाने की कोशिश की कि जो चीज़ खुद अपनी मदद नहीं कर सकती, वो दूसरों की मदद कैसे करेगी? जो बोल नहीं सकती, वो आपकी फ़रियाद कैसे सुनेगी? जो सुन नहीं सकती, वो आपकी दुआओं का जवाब कैसे देगी?
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी अक्ल और समझ का इस्तेमाल करना चाहिए। अल्लाह तआला ने हमें अक्ल दी है ताकि हम सच्चाई को पहचानें। अगर हम अपनी अक्ल से काम लें, तो हम कभी भी ऐसी चीज़ों की पूजा नहीं करेंगे जो न बोल सकें, न सुन सकें, न देख सकें।
यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की तरफ बुलाती है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वही सुनता है, वही देखता है, वही जवाब देता है। जब हम उसी से माँगते हैं, तो वह सुनता है और जवाब देता है। यही सच्ची खुशी और कामयाबी का रास्ता है।
इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि सच्चाई को पेश करने में हिम्मत और साहस चाहिए। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अकेले अपनी पूरी क़ौम के सामने सच बोला और उनके बुतों का मज़ाक़ उड़ाया। हमें भी सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, चाहे लोग हँसें या विरोध करें। अल्लाह सच्चाई पर क़ायम रहने वालों के साथ है।
📜 आयत 90-94 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 92
सूरा अस-साफ्फात आयत 92 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : आख़िर तुम खाते क्यों नहीं (अरे तुम्हें क्या हो गया…सूरा आयत 92/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 90–94. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


