अल-आराफ · 121/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالُوا آمَنَّا بِرَبِّ الْعَالَمِينَ ۝١٢١
Qaaloo aamannaa bi Rabbil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَالُوا: उन्होंने कहा
  • آمَنَّا: हम ईमान लाए
  • بِرَبِّ الْعَالَمِينَ: सारे संसारों के पालनहार पर

व्याख्या:

जादूगरों ने जब मूसा (अलैहिस्सलाम) के सत्य को स्पष्ट रूप से देख लिया, और उन्हें यह बात स्पष्ट हो गई कि यह कोई जादू नहीं, बल्कि अल्लाह का सच्चा चमत्कार है, तो वे तुरंत सच्चाई के आगे झुक गए। उन्होंने अपने घुटने टेक दिए और सजदे में गिर पड़े, और यह घोषणा की: "हम ईमान लाए सारे संसारों के पालनहार पर।" उन्होंने यह नहीं कहा कि हम मूसा के रब पर ईमान लाए, बल्कि उन्होंने उसे सारे संसारों का रब कहा, जो उनके ईमान की गहराई और उनके दिल की पवित्रता को दर्शाता है। उन्होंने फिरौन के भय और उसकी धमकियों की परवाह किए बिना, सच्चाई को स्वीकार कर लिया, क्योंकि उन्होंने अपनी आँखों से सत्य को देख लिया था और उनके दिलों में अल्लाह का डर फिरौन के डर से बढ़ गया था।

फ़ायदे:

  • यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को स्वीकार करने में देरी नहीं करनी चाहिए, चाहे उसकी कीमत कुछ भी हो। जादूगरों ने फिरौन के क्रोध और प्रतिशोध की परवाह किए बिना सच्चाई को स्वीकार किया।
  • यह दर्शाता है कि जब सच्चाई स्पष्ट हो जाए, तो उसे स्वीकार करना ही सच्चा ईमान है, और यही अल्लाह की ओर से हिदायत का रास्ता है।
  • यह हमें सिखाता है कि ईमान लाने के बाद इंसान को अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए, और किसी भी मख़लूक़ (प्राणी) का डर उसे सच्चाई से नहीं रोकना चाहिए।
  • यह घटना इस बात की गवाह है कि अल्लाह का दीन (धर्म) हमेशा सच्चाई के प्यार करने वालों के लिए जीत लाता है, चाहे वे कितने भी कमज़ोर क्यों न हों।
🎧 सुनें

📜 आयत 119-123 — अल-आराफ

119فَغُلِبُوا هُنَالِكَ وَانقَلَبُوا صَاغِرِينَ
पस फिरऔन और उसके तरफदार सब के सब इस अखाड़े मे हारे और ज़लील व रूसवा हो के पलटे
120وَأُلْقِيَ السَّحَرَةُ سَاجِدِينَ
और जादूगर सब मूसा के सामने सजदे में गिर पड़े
121قَالُوا آمَنَّا بِرَبِّ الْعَالَمِينَ
और (आजिज़ी से) बोले हम सारे जहाँन के परवरदिगार पर ईमान लाए
122رَبِّ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
जो मूसा व हारून का परवरदिगार है
123قَالَ فِرْعَوْنُ آمَنتُم بِهِ قَبْلَ أَنْ آذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّ هَٰذَا لَمَكْرٌ مَّكَرْتُمُوهُ فِي الْمَدِينَةِ لِتُخْرِجُوا مِنْهَا أَهْلَهَا ۖ فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ
फिरऔन ने कहा (हाए) तुम लोग मेरी इजाज़त के क़ब्ल (पहले) उस पर ईमान ले आए ये ज़रूर तुम लोगों की मक्कारी है जो तुम लोगों ने उस शहर में फैला रखी है ताकि उसके बाशिन्दों को यहाँ से निकाल कर बाहर करो पस तुम्हें अन क़रीब ही उस शरारत का मज़ा मालूम हो जाएगा
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अनुवाद — अल-आराफ 121

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Tuesday, August 18, 2026

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