अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِلَىٰ رَبِّكَ — तुम्हारे रब की ओर
- مُنتَهَاهَا — उस (क़ियामत) की अंतिम जानकारी / उसका अंतिम छोर (यानी उसके होने के समय का ज्ञान)
तफ़सीर:
ऐ नबी! यह आयत उस सवाल का जवाब देती है जो मुशरिकीन आपसे क़ियामत के वक़्त (समय) के बारे में मज़ाक़ और अंदाज़ में पूछते थे। वे पूछते थे कि क़ियामत कब आएगी? अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि क़ियामत के आने का सही वक़्त सिर्फ़ अल्लाह ही जानता है। उसका इल्म आप तक नहीं पहुँचाया गया, बल्कि उसकी अंतिम जानकारी तो आपके रब ही तक ख़त्म होती है। यानी इसका पूरा और सटीक ज्ञान सिर्फ़ अल्लाह के पास है, और उसका इल्म किसी और को नहीं दिया गया।
यह बात हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है कि क़ियामत का वक़्त एक ऐसा रहस्य है जिसे अल्लाह ने अपने पास महफ़ूज़ रखा है। हमें चाहिए कि हम उस दिन की तैयारी में लगे रहें, उसके आने के वक़्त की जाँच-पड़ताल में न पड़ें। क़ियामत का आना यक़ीनी है, लेकिन उसका वक़्त अल्लाह के सिवा कोई नहीं जानता। यही हमारे ईमान की निशानी है कि हम उस दिन पर बिना किसी शक के ईमान रखें और अपने आमाल (अच्छे कामों) को सुधारें।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इंसान को उन चीज़ों में उलझना नहीं चाहिए जो उसके इख़्तियार में नहीं हैं, बल्कि उन कामों में मशग़ूल रहना चाहिए जो उसके लिए फ़ायदेमंद हैं — यानी नेकी, तक़वा और अल्लाह की इबादत। क़ियामत का दिन जब आएगा तो हर शख्स अपने किए हुए आमाल का बदला पाएगा। मोमिन के लिए यही काफ़ी है कि वह उस दिन की तैयारी करे, क्योंकि उस दिन की हौलनाकी का अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है — जैसा कि दूसरी आयतों में बयान हुआ है कि लोग उस दिन को देखकर महसूस करेंगे कि वे दुनिया में बहुत थोड़ा समय रहे थे।
इसलिए ऐ बंदे! अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को नेकी में गुज़ार, क्योंकि क़ियामत का वक़्त तो अल्लाह ही जानता है, लेकिन उसकी आमद यक़ीनी है। तैयार रहने वाला ही कामयाब होगा।
📜 आयत 42-46 — अन-नाज़ियात
अनुवाद — अन-नाज़ियात 44
सूरा अन-नाज़ियात आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम उसके ज़िक्र से किस फ़िक्र में होसूरा आयत 44/46 — अन-नाज़ियात النازعات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नाज़ियात सुनें, अन-नाज़ियात अनुवाद, अन-नाज़ियात mp3, अन-नाज़ियात pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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